सहस्त्र धारा
अमरकंटक से एक छोटी सी धारा के रूप में उत्सर्जित नर्मदा, मण्डला पहुँचने तक एक वृहद नदी के रूप में परिवर्तित हो जाती है । मण्डला तक की अपनी 180 किमी क़ी यात्रा के दौरान छ: छोटी सहायक नदियाँ भी नर्मदा में मिल जाती है । यहाँ पर नर्मदा का पानी नदी तल पर उभरें असंख्य बेसाल्ट चट्टानों को चीरकर बहता है, जिससे ऐसी तस्वीर बनती है जैसे नदी हजार धाराओं में बह रही हो । सहस्त्रधारा से जुड़ी कई कहानियाँ हैं । एक पौराणिक कथा बताती है कि किस तरह से हजार भुजाओं वाले एक देवता, सहस्त्रबाहु के द्वारा नदी को रोकने के प्रयास असफल हुए थे । अपने अनेक प्रयासों के बावजूद वह नर्मदा के बहाव को रोक नहीं पाये । नर्मदा सहस्त्रबाहु की अंगुलियों के बीच में से फिसल कर अपने यात्रा पथ पर लगातार बहती रही । ओजस्वी नर्मदा के भव्य बहाव की सुन्दरता का आनन्द मण्डला सहस्त्रधारा पर लेना ही चाहिए नर्मदा यहाँ पर अपने अत्यंत सुंदर रूप में बहती है ।