नर्मदा नदी की चारित्रिक विशिष्टताएँ
- तापी के अलावा पश्चिम की ओर बहने वाली भारत की एक एकमात्र प्रमुख नदी ।
- नर्मदा नदी का मार्ग पूर्व सुनिश्चित है । विंध्य तथा सतपुड़ा की पहाड़ियों ने जल देवी के यात्रा पथ का निर्माण किया है । करीब-करीब सभी नदिया ने भू-रक्षण तथा स्खलन आदि के कारण अपने मार्ग को परिवर्तित किया है । किन्तु, नर्मदा अधिकाधिक भाग में पहाड़ी श्रृंखलाओं के रूप में ठोस तथा मजबूत किनारे हैं ।
- जल देवी के मार्ग अधिकार को सतपुड़ा और विंध्य पहाड़ी श्रृंखलाएँ अंगरक्षक के रूप में रक्षित करते है। ।
- उत्तर की अधिकांश नदियाँ अपने बारहमासी बहाव चरित्र के लिए हिम पर अवलंबित हैं। परन्तु नर्मदा बारहमासी बहाव चरित्र के होते हुए भी अपने जीवन के लिए हिम पर निर्भर नहीं है बल्कि धरती माता के कोख में बहते हुए निर्झर जल पर अवलंबित है ।
- अधिकांश उप नदियाँ नर्मदा के ऊपरी थाले में नर्मदा से मिलती है । निचले थाले में उपनदियों की संख्या अपेक्षाकृत कम है ।
- वन सम्पदा अधिकतर ऊपरी थाले तथा उद्गम स्थल पर धनीभूत है और जैसे-जैसे नदी चौड़ी होती जाती है और खम्भात की खाड़ी के मुहाने पर पहुँचती है यह निम्नतर होती जाती है ।
- भारत की यह एकमात्र नदी है जिसकी आराधना भक्तों द्वारा परिक्रमा करके की जाती है । एक बार जब भक्त अपनी नदी के चारों ओर की पवित्र यात्रा अर्थात् परिक्रमा शुरू कर देता तब तक यह तोड़ा नहीं जाता है जब तक कि यह समाप्त न हो ।